Sunday, November 9, 2008

अभी तो बस इतना ही

दोस्‍तो,
अभी तो बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बहुत दिनों से लिख नहीं पाया इसका खेद है। दिल से माफी मांगता हूं। इसका एक कारण तो यह था कि कुछ घरेलू काम ज्‍यादा समय मांग रहे थे और दूसरा मुख्‍य कारण यह था कि जिन मुद़दों पर लिखने का मन था वे जितना समय मांग रहे थे उतना देने के लिए था नहीं। बहरहाल, अब उम्‍मीद है कि समय निकल पाएगा। मैं कई विषयों पर लिखना चाहता हूं। राज ठाकरे की मराठी जिद, साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर की तथाकथित राष्‍टीय अस्मिता की जिद, बराक ओबामा के अश्‍वेत और काले लिखे पर मत भिन्‍नता आदि। लेकिन थोड़ा सा समय चाहिए। यह पोस्टिंग केवल इसलिए ताकि अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकूं।
सादर आप सभी का
अमन

2 comments:

अफ़लातून said...

खैरम कदम के साथ हाजिरी दर्ज़ । अब इन्तेज़ार रहेगा।

bahadur patel said...

thik hai aman ji aapaki post ka intzar kar rahe hain.