Saturday, June 12, 2010

आखिर एंडरसन ने किया क्‍या है

भोपाल गैस हादसे के लिए इन दिनों हर कोई एंडरसन के पीछे हाथ धोकर पडा हुआ है, मानो उसे पकड लिया तो भोपाल में हुई 25 हजार मौतों और लाखों लाइलाज बीमारियों का हल मिल जाएगा, दुख तो इस बात का है कि भोपाल में गैस हादसा होने देने के लिए एंडरसन की यूनियन कार्बाइड को जिन् लोगों की लापरवाही और जिल्‍लत भरी लालच ने इजाजत और मौका दिया उन्‍हें कोई क्‍यों नहीं पकड रहा है,
आखिर केशब महिंद्रा ही वह शख्‍स था जो तब यूनियन कार्बाइड का चेयरमैन था और जाहिर तौर पर भारत में कंपनी के हर मुनाफे की तरह उससे होने वाली तबाही के लिए जिम्‍मेदार भी, अगर वह आज महिंद्रा और महिंद्रा का चेयरमैन बनकर करोडों रुपए का मालिक बना बैठा है तो क्‍या मीडिया की यह जिम्‍मेदारी नहीं बनती कि एंडरसन के ही बराबर उसे भी जिम्‍मेदार समझें और एंडरसन के प्रत्‍यर्पण की ही तर्ज पर देश में मौजूद इस अदालत की ओर से दोषी करार दिए गए अपराधी को सजा का हकदार बनाने की मुहिम छेडें,
लेकिन आज मीडिया के लिए महिंद्रा विज्ञापन का एक बडा स्रोत है जबकि एंडरसन के खिलाफ अभियान छेडनें में नुकसान नहीं फायदा ही फायदा है, सो सारे अखबार और चैनल देशी अपराधियों को छोडकर अमेरिका में जा बसे एंडरसन के पीछे हाथ धोकर पडे हैं, सवाल इस बात का है कि जो केशब महिद्रा 84 में यूनियन कार्बाइड के हादसे के लिए दोषी ठहराया जा चुका है उसकी तमाम कंपनियों को किस आधार पर देश में चलने की मंजूरी दी जा रही है आखिर इस बात की क्‍य गारंटी है कि उसकी कंपनियों से देश में ऐसे और भोपाल गैस हादसे नहीं होंगे,

जारी

5 comments:

Ajit Sharma said...

Aap sahi kah rahe hai lekin ye desh hi esha hai kya kare

अनुराग मुस्कान said...

आखिर एंडरसन ने किया क्‍या है?

बड़ा सवाल है।

ab inconvinienti said...

In 1982, an audit team had visited Union Carbide in Bhopal. They had inspected the plant and said that certain safety measures must be taken, otherwise there could be a gas leak. Printed the report of the visit of the audit team and their observations in Jansatta before the 1984 gas leak.

At 15 places in that report, they had written that safety measures are not proper and it could have a 'runaway' reaction. So the plant had problems before the leak in 1984. There is enough proof. Second, UCC, USA said they were not involved in the day to day running of the plant so they could not be made responsible. There are telex messages as proof which shows that the company in USA was totally involved in all the decisions of the company in Bhopal. They were sending instructions to Bhopal.

Anderson was then head of UCC, and UCC management at USA instructed Bhopal plant to save money on safety. While loopholes at US plants promptly fixed.

Who is responsible for orders to save money on safety? The person handling the company i.e. Anderson.

UCC India had a works manager named J Mukund (one of the accused who was convicted on June 7). He had sent a message asking for advice about coating the pipes. The US-based parent company sent him a message saying that the best material for piping would be too expensive and too difficult to acquire. How can UCC, USA escape their responsibility when they were advising Bhopal to economise on safety measures? They were telling Bhopal to use cheaper material. They were advising it to compromise on safety. Mukund's message was sent on August 27, 1984. Just a few weeks before the fateful leak.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

एंडरसन का दोष जरा भी कम नहीं है। उस से अधिक दोष उन का है जिन्हों ने उसे छोड़ दिया। महिन्द्रा भी बराबर का दोषी है। यह जानते हुए भी उसे एनडीए सरकार के प्रमुख अटल बिहारी वाजपेयी ने ईनाम से नवाजा था। हम्माम में सब नंगे हैं। एंडरसन, अंबानी और महिंद्रा सब इस युग के शासक हैं और राजनेता उन के चाकर। जनता फंसी है उन के जाल में, जनता को जाल काटना होगा।

honesty project democracy said...

सजा तो चीफ जस्टिस को भी मिलना चाहिए जो आजीवन ट्रस्टी बनने के लिए न्याय को अन्याय में बदलने का काम किया ,कानून में सब बराबर है यह सिर्फ लिख देने से नहीं होगा बल्कि उसे अमल में लाकर आम जनता और देश को महसूस कराने से होगा ,हमारे नजर में तो अहमदी जी का ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट किया जाय और यह जरूर पता किया जाय की क्या उन्होंने किसी प्रकार की रिश्वत खायी या नहीं ?